समन्दरों में मुआफिक* हवा चलाता है
जहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है ।
[*favourable]
ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये
वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है ।
वो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाजों में
मगर सुना है कि शब को जुआ चलाता है ।
ये लोग पांव नहीं जेहन से अपाहिज हैं
उधर चलेंगे जिधर रहनुमा चलाता है ।
हम अपने बूढे चिरागों पे खूब इतराए
और उसको भूल गए जो हवा चलाता है ।
- राहत इन्दौरी
जहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है ।
[*favourable]
ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये
वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है ।
वो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाजों में
मगर सुना है कि शब को जुआ चलाता है ।
ये लोग पांव नहीं जेहन से अपाहिज हैं
उधर चलेंगे जिधर रहनुमा चलाता है ।
हम अपने बूढे चिरागों पे खूब इतराए
और उसको भूल गए जो हवा चलाता है ।
- राहत इन्दौरी
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